WhatsApp Group Join Now

Christmas tree in hindi | क्रिसमस वृक्ष की पूरी जानकारी

Christmas tree in hindi :- जय हिंद दोस्तों, क्रिसमस वृक्ष धार्मिक वृक्ष होने के साथ-साथ बेहद खूबसूरत होता है। इसका मूल निवास स्थान जर्मनी नमक देश है। क्रिसमस का वैज्ञानिक नाम Araucaria columnaris है। मध्यकाल में क्रिसमस वृक्ष के टहनी से भूत प्रेत को भगाया जाता था। पूरी दुनिया में इसकी लगभग 55 प्रजातियां मौजूद है। क्रिसमस वृक्ष में ईसाई धर्म के गोड ईसा मसीह जी का वास माना जाता है। क्रिसमस बेहद विचित्र वृक्ष है जो दिखने में आकर्षक एवं खूबसूरत के साथ-साथ मनमोहन भी होता है। प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को क्रिसमस वृक्ष को सजाया जाता है और पूरे धूमधाम से ईसा मसीह जी का जन्मदिन मनाया जाता है।
आज इस लेखन Christmas tree in hindi के माध्यम से आप सभी को क्रिसमस वृक्ष से संबंधित जितने भी महत्वपूर्ण जानकारियां है आपके साथ साझा करेंगे।

क्रिसमस वृक्ष की पूरी जानकारी l About information of Christmas tree in hindi

क्रिसमस वृक्ष की ऊंचाई लगभग 10 से 15 फिट होती है कुछ प्रजातियों में इनकी ऊंचाई अधिक देखी गई है।

क्रिसमस वृक्ष की औसत जीवन काल लगभग 10 से 12 वर्ष होता है।

क्रिसमस वृक्ष को स्थानीय भाषा में देवदार वृक्ष कहा जाता है।

भारत के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, एवं जम्मू कश्मीर में अधिक मात्रा में क्रिसमस वृक्ष पाए जाते है। जो वहां की खूबसूरती को और निखारता है।

Christmas tree

 

संपूर्ण विश्व में 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस डे के रूप में मनाया जाता है।

ईसाई धर्म के धार्मिक ग्रंथ बाइबिल के अनुसार घर में क्रिसमस वृक्ष लगाने से घर में सुख समृद्धि बना रहता है घर में लक्ष्मी का आगमन होते रहता है। घर के सदस्यों में आपसी मतभेद नहीं होता है।

ऐसा माना जाता है कि अगर आपकी लाइफ में किसी प्रकार की समस्या है आप उसका निवारण नहीं कर पा रहे हैं तो आप रोजाना क्रिसमस वृक्ष के नीचे एक मोमबत्ती जलाएं जिससे आपके अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होगी और आप उस समस्या का समाधान करने में सक्षम होंगे।

घर के प्रवेश द्वार पर क्रिसमस वृक्ष को नहीं लगाना चाहिए ईसाई धर्म के अनुसार अगर आप ऐसा करते है तो आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा एवं लक्ष्मी का आगमन नहीं हो पता है।

वैज्ञानिकों के एक रिपोर्ट के अनुसार क्रिसमस वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड को अधिक मात्रा में अवशोषित कर उसको ऑक्सीजन में तब्दील करने का काम करता है। जिसकी वजह से आसपास का वातावरण काफी शुद्ध एवं मनमोहक होता है।

17वीं शताब्दी के शुरुआत शुरुआत से क्रिसमस वृक्ष में मोमबत्ती जलने की प्रथा की शुरुआत की गई। क्रिसमस वृक्ष में मोमबत्ती जलाने से लंबी आयु होती है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।

1851 ईस्वी में न्यूयॉर्क शहर में एक अमेरिकी निवासी मार्क ने पहली बार क्रिसमस ट्री को सजाए थे। इसके पश्चात अमेरिका के लोगों ने क्रिसमस वृक्ष की महत्व को जाना और वहां इसका व्यापार भी किया जाने लगा और यह व्यापार धीरे-धीरे एक विशाल व्यापार में तब्दील हो गया।

पूरी दुनिया में क्रिसमस वृक्ष को आर्टिफिशियल रूप से लगभग 80% से ज्यादा उत्पादक चीन करता है। पूरी दुनिया में चीन के दोबारा ही आर्टिफिशियल क्रिसमस वृक्ष को बेचा जाता है।

यूरोप के देशों में यह एक प्रकार से यह मान्यता हो गया है कि प्रत्येक घर में क्रिसमस का वृक्ष लगाना है। यह फिर बाजार से प्लास्टिक का क्रिसमस वृक्ष खरीद कर घर पर लगाते है। यूरोपीय देशों के कुछ अमीर व्यक्ति क्रिसमस वृक्ष को पूरी अच्छी तरह से सजा कर रखते है। कुछ ऐसे भी लोग है जो क्रिसमस वृक्ष को सोने चांदी से सजाते है।

17वीं शताब्दी की शुरुआत में नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, रूस, इटली आदि देशों में भूत प्रेत का प्रकोप बहुत ज्यादा बढ़ गया था उसे समय छपे एक रिपोर्ट में यह बताया गया है की डर इतना भयानक था कि रात होते ही लोग घर से बाहर नहीं निकलते थे। इस समस्या का निवारण लोग, क्रिसमस वृक्ष को घर में लगाकर समाप्त किए। ऐसा इसलिए हो पाया की क्रिसमस वृक्ष जहां भी होता है वहां भूत प्रेत का साया नहीं होता है। यह बात पूरे यूरोप में धीरे-धीरे फैल गया जिसके वजह से पूरे यूरोपीय देशों में लगभग प्रत्येक घर में क्रिसमस वृक्ष को लगाया गया था।

प्रथम सदी की शुरुआत में जब ईसा मसीह जी का जन्म होता है, तब ईसा मसीह के माता मरियम एवं पिता जोसेफ से मिलने के लिए स्वर्ग से दूत आते हैं और उपहार के रूप में क्रिसमस वृक्ष को देते है, जिसकी वजह से क्रिसमस वृक्ष को इतना मान्यता प्राप्त हुआ है।

17वीं सदी में इंग्लैंड एवं अमेरिका में यह परंपरा प्रचलित हुआ कि क्रिसमस वृक्ष को 25 दिसंबर के दिन सजाया जाएगा और ईसा मसीह के जन्मदिन को धूमधाम से मनाया जाएगा। यह प्रथा इसी समय पूरी दुनिया में प्रचलित हुआ था।

Christmas tree

 

क्रिसमस वृक्ष की कुछ महत्वपूर्ण प्रजातियां

क्रिसमस का मूल निवास स्थान जर्मनी है इसके अलावे बहुत ऐसे देश है जहां पर क्रिसमस वृक्ष अधिक मात्रा में पाई जाती है जो इस प्रकार से है अफ्रीका, भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस, चीन, जापान, मंगोलिया, यूक्रेन, मलेशिया, म्यांमार, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि

और पढ़ें निलगिरी वृक्ष की जानकारी

क्रिसमस वृक्ष की कुछ प्रजातियां जिनके बारे में जानना बेहद जरूरी है

Noble fir, White fir, Fraser fir, grand fir, abies alba, balsam fir, nordmann fir, Korean, abies sibirica, abies cephalonica, abies firma, subalpine fir, red fir, abies pinsapo, abies cilicica, Pacific silver fir, abies veitchii, abies holophylla, abies guatemalensis, abies numidica, abies sachalinensis, abies homolepis, abies nephrolepis, abies mariesii, abies pindrow, abies vejarii, abies nebrodensis, abies spectabilis, abies squamata, abies hickelii, abies borisii regis,

दोस्तों मुझे यह जानकर खुशी होगी कि आपको हमारा लेख Christmas tree in hindi बेहद पसंद आया होगा और क्रिसमस वृक्ष से संबंधित जानकारी प्राप्त हुआ होगा। अगर गलती से हमसे किसी प्रकार की जानकारी छूट गई है तो आप हमें टिप्पणी के माध्यम से अवश्य बताएं।

Leave a Comment