WhatsApp Group Join Now

Eucalyptus tree information in Hindi | नीलगिरी वृक्ष की पूरी जानकारी

Eucalyptus tree in Hindi – जय हिंद दोस्तों, खूबसूरत वृक्षों में से एक नीलगिरी का वृक्ष जिसका निवास स्थान ऑस्ट्रेलिया एवं तस्मानिया है। नीलगिरी वृक्ष का वानस्पतिक नाम Eucalyptus globulus है। नीलगिरी वृक्ष को सफेद वृक्ष एवं स्थानीय भाषा चेरका पेड़ भी कहा जाता है। इसकी लंबाई 100 से 120 फीट तक होती है, कुछ ऐसी प्रजाति है जिनकी लंबाई 120 फीट से अधिक होती है।

नीलगिरी वृक्ष का औसतन जीवन काल 150 से 200 वर्ष तक होता है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से यह वृक्ष बहुत महत्वपूर्ण है। किसान नीलगिरी वृक्ष की खेती में काफी जोर दे रहे है, क्योंकि इस वृक्ष से कागज, प्लाईवुड आदि वस्तुएं बनाई जाती है।
आज इस लेखन Eucalyptus tree in Hindi के बारे में पूरी विस्तार से बात की जाएगी जिससे आप लोगों की नीलगिरी वृक्ष से संबंधित जितनी समस्याएं है, उनको दूर करने की कोशिश करेंगे।

 Information of Eucalyptus tree in Hindi | नीलगिरी वृक्ष की पूरी जानकारी

नीलगिरी वृक्ष 100 से 120 फीट ऊंचा एवं इसकी चौड़ाई तीन से चार फीट तक हो सकती है। नीलगिरी वृक्ष दिखने में सफेद एवं हल्का पीले रंग के होते है, और पत्ते हरे एवं पीले रंग के होते है।

नीलगिरी वृक्ष का औसतन जीवन काल 150 से 200 वर्ष तक होता है। वही Eucalyptus Camaldulensis नामक प्रजाति का नीलगिरी वृक्ष 700 से 800 वर्ष तक जीवित रहने में सक्षम है। नीलगिरी वृक्ष हमारे पृथ्वी पर लगभग 50 मिलियन वर्ष से मौजूद है।

नीलगिरी वृक्ष का फूल दिखने में सूरजमुखी फूल की तरह होती है बस यह आकार में उससे बहुत छोटी होती है। इसके चारों ओर झिल्ली होती है और बीच में फूल होता है। इसका बीज काफी कठोर होता है।

नीलगिरी वृक्ष का मूल निवास स्थान ऑस्ट्रेलिया एवं तस्मानिया है। इन देश के अलावे कुछ ऐसे देश है जहां पर निलगिरी वृक्ष की खेती की जाती है जो इस प्रकार से है, चिली, ब्राजील, पुर्तगाल, अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, बर्मा, चीन, न्यूजीलैंड, रूस, स्पेन, इटली, आदि देश है जहां से खेती की जाती है।
भारत के ऐसे राज्य जहां पर नीलगिरी की खेती की जाती है, वह इस प्रकार है। झारखंड, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा, पंजाब, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश आदि राज्य है।

 Important Information of Eucalyptus tree in Hindi | नीलगिरी वृक्ष की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

नाम हिंदी में –                    नीलगिरी, सफेद वृक्ष
अंग्रेजी में –                          Eucalyptus tree in hindi
वैज्ञानिक नाम –                  Eucalyptus globulus
वंश –                                   यूकेलिप्टस
जगत –                                पादप
प्रजातियां –                          लगभग 700
निवास स्थान –                   ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया

नीलगिरी वृक्ष के पत्ते तेल के फायदे

नीलगिरी वृक्ष के ताजे पत्तियों को डिस्टीलेशन के माध्यम से तेल निकाला जाता है जो स्वाद हीन होता है। नीलगिरी का तेल जितना पुराना होगा उसमें एंटीसेप्टिक और औषधि उतनी ही अधिक मात्रा में बढ़ती जाती है। नीलगिरी तेल का सबसे खास बात यह है कि यह केवल मादक पदार्थ में ही घुलनशील है। इसके तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश चीन है जो पूरी दुनिया की लगभग 75% उत्पादन करता है। नीलगिरी तेल की कुछ अद्भुत फायदे जो नीचे दी गई है।

  1. नीलगिरी के तेल में ऐसे औषधि पाए जाते है जो सर्दी एवं खांसी को दूर करने में सहायता करते है।
  2. सिर दर्द, गले में दर्द आदि की समस्या को दूर करता है।
  3. मलेरिया जैसी बीमारी को भी समाप्त करता है।
  4. सील पेन के दर्द को जड़ से खत्म करता है।
  5. रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।
नीलगिरी वृक्ष की ब्लू गम का उपयोग

नीलगिरी वृक्ष के छाल में कुछ तरल पदार्थ पाए जाते है, जिसका ब्लू गम बनाया जाता है। इसका उपयोग दवा एवं कीटनाशक वस्तुएं बनाने में की जाती है। नीलगिरी वृक्ष के ब्लू गम को सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया देश के स्थानीय आदिवासियों ने इसकी पहचान किए थे।

नीलगिरी वृक्ष की कुछ प्रजातियां जिनके बारे में जानना बेहद जरूरी है।

1. Eucalyptus gunni :- नीलगिरी वृक्ष की इस प्रजाति का दूसरा नाम साइडर गम है। इसके पत्ते मोटे एवं बड़े होते है। इसका मूल निवास स्थान तस्मानिया एवं ऑस्ट्रेलिया है।

2. Eucalyptus Camaldulensis :- इस प्रजाति को रेड गम के नाम से भी जाना जाता है। नीलगिरी वृक्ष की इस प्रजाति में टहनियों की संख्या अधिक होती है। इसका मूल निवास स्थान ऑस्ट्रेलिया है।

3. Rainbow eucalyptus in hindi :- इसका अन्य नाम इंद्रधनुष है जो दिखने में बहुत सुंदर होता है। इस प्रजाति के अधिकांश वृक्ष वर्षावन में देखी गई है। इसका मूल निवास स्थान पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस, इंडोनेशिया, देश है।

4. Eucalyptus cinerea :- नीलगिरी वृक्ष की इस प्रजाति का अन्य नाम सिल्वर डॉलर है। इसका मूल निवास स्थान ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड है।

5. Eucalyptus grandis :- इसको गुलाब गम के नाम से जाना जाता है। इस प्रजाति के वृक्ष की ऊंचाई लगभग 80 मीटर तक हो सकते है। इसका मूल निवास स्थान चिली, रूस, भारत आदि देश है।

6. Corymbia
7. Eucalyptus saligna
8. Eucalyptus globulus subsp globulus
9. Eucalyptus robusta
10. Eucalyptus regnans
11. Eucalyptus pulverulenta
12. Eucalyptus urophylla
13. Eucalyptus leucoxylon
14. Eucalyptus tereticomis
15. Eucalyptus radiata
16. Eucalyptus mannifera
17. Lemon scented gum
18. Eucalyptus nitens
19. Eucalyptus viminalis
20. Eucalyptus pauciflora

नीलगिरी वृक्ष की खेती कैसे करें

नीलगिरी की खेती शुरू करने से पहले इन बातों को ध्यान में रखना होगा। आपको ऐसी जगह का चुनाव करना है जहां पर प्रॉपर धूप आता हो। इसके पश्चात मिट्टी की पीएच मान 6 से 7 के बीच होनी चाहिए।

नर्सरी से आपको अच्छे किस्म के पौधे के चुनाव करना है। और जब आप पौधे लगाते है तो एक से दूसरे पौधे के बीच की दूरी लगभग 8 फीट होनी चाहिए।

वर्षा ऋतु के आगमन के समय आप पौधे की रोपाई कर सकते है। यह ऋतु निलगिरी वृक्ष की खेती के लिए अनुकूल होती है।

नीलगिरी के पौधे को ऐसे स्थान में लगाना है जहां जल निकासी की व्यवस्था हो एवं जल का भंडार हो जैसे तालाब, नदी, नहर आदि उपलब्ध हो।

नीलगिरी वृक्ष के नुकसान

कुछ किसान भाई अधिक लाभ के कारण अपने खेत के कोने पर नीलगिरी वृक्ष को लगा देते है, ताकि अधिक मुनाफा हो लेकिन यह निर्णय उनके लिए भारी पड़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है नीलगिरी के एक वृक्ष को एक दिन में लगभग 10 से 12 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। जब वृक्ष को पानी की पूर्ति नहीं हो पाती है तो खेत के पानी को धीरे-धीरे अवशोषित करने लगता है। जिसकी वजह से खेत में लगे फसल खराब होने लगते है और धीरे-धीरे यह जमीन बंजर में तब्दील हो जाती है।

About Maple tree in Hindi | मेपल वृक्ष की संपूर्ण जानकारी

दोस्तों मुझे यह जानकर बेहद खुशी होगी कि आपको हमारा लेख Eucalyptus tree in Hindi बेहद पसंद आया होगा। और आपको इस वृक्ष से संबंधित जानकारी पूरी तरह से प्राप्त हो गई होगी, अगर आपको लगता है कि हमसे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी छूट गई है तो आप हमें टिप्पणी करके अवश्य बताएं।

Leave a Comment