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Millet in hindi | मिलेट की पूरी जानकारी

Millet in hindi :- जय हिंद दोस्तों, मिलेट क्या है, इसके उत्पादन में हमारे सरकार जोर क्यों दे रही है आखिर ऐसा क्या हुआ था जो इसके उत्पादन में कमी लाई गई थी। बाजरा एक मोटा अनाज है। जिसमे कई प्रकार के मिनरल्स और विटामिन पाए जाते है। पूरी दुनिया में इसकी कई प्रजातियां मौजूद है। वर्तमान में अफ्रीकी देशो में इसका उत्पादन अत्यधिक मात्रा में की जा रही है। बाजरा एक ऐसी फसल है जिसको कम एवं अधिक वर्षा में भी उत्पादन किया जा सकता है। बाजरा अपना संबंध poaceae परिवार से रखता है। बाजरा अफ्रीका के साथ-साथ भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, उज़्बेकिस्तान, नाइजीरिया, आदि देश में इसका उत्पादन किया जाता है।
आज हम अपनी लेखन प्रणाली में Millet in hindi से संबंधित जानकारी आपके साथ साझा करेंगे।

मिलेट की सामान्य जानकारी | General Information millet in hindi 

मिलेट एक मोटा अनाज है। मोटा अनाज से संबंधित कुछ अन्य अनाज जो मिलेट के अंतर्गत आता है। कंगनी बाजरा ( Foxtail Millet in hindi ), कोदो बाजरा ( kodo millet in hindi ), बाजरा ( pearl millet in hindi ), रागी ( Finger millet in hindi ), बढ़िया बाजरा ( Great millet in hindi), ज्वार ( Sorghum millet in hindi), कुटकी ( panicum antidotale ), चेना ( proso millet in hindi ) यह सब मोटे अनाज के अंतर्गत आते है।

1. कंगनी बाजरा ( Foxtail Millet in hindi ) :- कंगनी का पौधा 6 से 8 फीट तक ऊंचा हो सकता है। कंगनी का बीज 1 से 2 मिलीमीटर बड़े वा हरे रंग के होते है, बीज हमेसा गुच्छे में फलता है।

पोषक तत्व

कंगनी में पोषक तत्व कैल्शियम, आयरन, क्लोरीन, जिंक, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, कैलोरी, वसा आदि उपस्थित है।

फायदे

  • कंगनी में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट से तनाव में राहत प्राप्त होता है।
  • पाचन प्रक्रिया को सुदृढ़ बनता है।
  • शरीर में खून की कमी को पूर्ति करता है।
  • कंगनी में उपस्थित कैल्शियम, क्लोरीन, आयरन, अर्थराइटिस हड्डियों के दर्द में राहत दिलाते है।

नुकसान

  • अत्यधिक सेवन से गैस की शिकायत हो सकती है।
  • पूरा पका हुआ ही कंगनी का सेवन करें अन्यथा आपको पेट से संबंधित समस्या उत्पन्न हो सकती है।

उत्पादन
कंगनी बीज की बुवाई जुलाई माह के अंत में की जाती है, और सितंबर से अक्टूबर माह में इसकी फसल तैयार हो जाती है। कंगनी के बीज पत्री भाग को खाने में एवं पौधे का उपयोग जानवर के चारे में किया जाता है। कंगनी का सबसे ज्यादा उत्पादन चीन देश में किया जाता है।

2. कोदो बाजरा ( kodo millet in hindi ) :- केदो का पौधा धान के पौधे का दूसरा रूप है। दोनों दिखने में समान होते है। केदो का बीज दिखने में धान जैसा होता है, केवल आकार में केदो का बीज गोलाकार होता है।

पोषक तत्व
मैग्नीशियम, पोटेशियम, जिंक, आयरन, कैल्शियम, शक्कर, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन सी, विटामिन डी, विटामिन बी 6, विटामिन b12, विटामिन a9 आदि भरपूर मात्रा में उपस्थित है।

फायदे

  • फोड़े फुंसी के लिए रामबाण है।
  • नियमित रूप से कोदो खाने से पेशाब से संबंधित समस्या का निवारण होता है।
  • मधुमेह जैसी बीमारी में भी लाभकारी होता है।

नुकसान

  • बूढ़े व्यक्तियों को इसके सेवन से बचना चाहिए क्योंकि यह पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
  • अत्यधिक केदो के सेवन से कब्ज की शिकायत हो सकती है।
  • केदो को चबाकर खाना चाहिए अन्यथा आपको उल्टी भी हो सकती है।

उत्पादन
बारिश के आगमन से कुछ दिन पहले ही इसकी बुवाई शुरू कर दी जाती है। केदो का फसल तैयार होने में 2 महीना लगता है। केदो को पूरी तरह पकने से पहले उसे काट कर खेत या खलियान लाया जाता है। इसके पश्चात केदो के बीज को निकाला जाता है।

3. बाजरा ( pearl millet in hindi ) :- बाजरे का पौधा 8 से 10 फीट ऊंचा हो सकता है। बाजरे का बीज गोल वा आकार में छोटा होता है। इसका उत्पादन एशियाई देशों में अधिक की जाती है।

पोषक तत्व
फोलेट, आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम, प्रोटीन, वसा, कैलोरी, फाइबर, कैल्शियम, आदि भरपूर मात्रा में उपस्थित है।

फायदे

  • बाजरे में उपस्थित पोषक तत्व फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता करते है।
  • बाजरे में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते है, जो बच्चों के शारीरिक विकास में सहायता करते है।

नुकसान

  • मधुमेह रोगी डॉक्टर के सलाह के बाद भी बाजरे का सेवन करें ।
  • अत्यधिक बाजरे के सेवन से गले में समस्या उत्पन्न हो सकती है।

उत्पादन
बाजरा उन दुर्लभ फसलों में आता है, जिसके फसल गर्मियों के दिनों में बोया जाता है। और बारिश आगमन के कुछ दिन पाश्चात्य ही इसके फसल को काट ली जाती है। बाजरे का उत्पादन अफ्रीकी देश एवं एशियाई देशों में अधिक की जाती है।

Millet In Hindi

4. रागी ( Finger millet in hindi ) :- रागी का पौधा दो से तीन फीट लंबा होता है। इसके बीज एक गुच्छे में होता है जो काले एवं भूरे रंग का होता है। रागी का मूल निवास स्थान इथोपिया है।

पोषक तत्व :- कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, रेशा, ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, मैंगनीज, फास्फोरस, जिंक, विटामिन b1, विटामिन b3, विटामिन b5, आदि भरपूर मात्रा में उपस्थित है।

फायदे

  • रागी में उपस्थित फास्फोरस, जिंक, आयरन, कैल्शियम डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
  • बालों की मजबूती प्रदान करता है।
  • हीमोग्लोबिन को बढ़ाता है।

नुकसान

  • किडनी रोगी रागी की सेवन ना करें।
  • जिनको पेट से संबंधित समस्या है वह रागी के सेवन से बचें।

उत्पादन

रागी के बीज को जुलाई माह के प्रारंभ में बो दिया जाता है। और सितंबर से अक्टूबर माह में रागी का फसल तैयार हो जाता है। इसके पश्चात फसल को काट लिया जाता है। गांव में रागी के पौधे का उपयोग जलावन एवं पशुओं के चारा में उपयोग करते है। भारत के उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, बिहार आदि राज्यों में रागी का उत्पादन किया जाता है।

5. ज्वार ( Sorghum millet in hindi ) :- ज्वार का पौधा मुख्य रूप से 4 से 6 फीट लंबा होता है। ज्वार का बीज गोलाकार आकार में जामुन के दाने जितना होता है। जो सफेद एवं अन्य रंग का हो सकता है।

पोषक तत्व
कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, जिंक, फाइबर, प्रोटीन, मिनरल्स, विटामिन बी आदि भरपूर मात्रा में उपस्थित है।

फायदे

  • ज्वार वजन कम करने में काफी सहायक होता है।
  • डायबिटीज के मरीज इसका सेवन कर सकते हैं।
  • ज्वार में उपस्थित फाइबर पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है।

नुकसान

  • अत्यधिक ज्वार के सेवन से रक्तचाप बढ़ सकता है।
  • बुजुर्ग इसके सेवन से बचें यह आसानी से पचता नहीं है।
  • अत्यधिक ज्वार के सेवन से फफूंदी नामक रोग हो सकता है।

उत्पादन
प्रारंभिक वर्ष में ज्वार फसल की बुवाई कर दी जाती है। फसल बुवाई के 2 से 2.5 महीना में फसल तैयार हो जाता है।
ज्वार का उत्पादन अमेरिका, अफ्रीका, चीन, भारत, बांग्लादेश, म्यांमार आदि देशों में की जाती है।

6. चेना ( proso millet in hindi ) :- चेना का पौधा 1 से 1.5 फीट ऊंचा वा बीज 2 से 3 मिलीमीटर तक बड़े होते है। भारत में इसका उत्पादन महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब में होता है।

पोषक तत्व
विटामिन बी, फोलिक एसिड, खनिज, अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, वसा, कॉपर, जिंक, मैग्नीशियम, फास्फोरस आदि

फायदे

  • हड्डियों के दर्द में रहता दिलाता है।
  • कब्ज जैसे समस्या से निजात दिलाता है।
  • बालों को मजबूत बनता है।

नुकसान

  • दमा के रोगी खाने से बचे।
  • जिनको पेट से संबंधित समस्या है वे सेवन न करें।
  • डायबिटीज के मरीज इसके सेवन से बचे।

उत्पादन
चेना एक आदर्श फसल है, यह शुष्क वातावरण में भी अच्छी फसल देता है। चेना ब्रिज की बुवाई जून जुलाई माह में की जाती है। यह फसल 2 महीने में तैयार हो जाता है। इसका उत्पादन तुर्की, यूक्रेन, रूस, रोमानिया आदि देशों में अत्यधिक मात्रा में की जाती है।

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बाजरे का इतिहास

बाजरे की खेती आज से 4,000 साल पहले अफ्रीका में की जाती थी सबसे पहले बाजरे की खेती अफ्रीका के लोगों ने की थी।

भारत में 3,000 ईसा पूर्व में सिंधु घाटी सभ्यता के लोग बाजरे की खेती किया करते थे उसे समय में सिंधु घाटी सभ्यता का प्रमुख फसल बाजरा ही था।

भारत सरकार ने बाजरे की खेती पर रोक क्यों लगाई थी

1960 के पहले भारत की प्रमुख फसल बाजरा ज्वार जैसे मोटे अनाज था। इसके पश्चात भारत में हरित क्रांति को लाया गया जिसके अंतर्गत गेहूं एवं चावल को अधिक महत्व दी गई जिसकी वजह से हमारे प्राचीन फसल मोटे अनाज के उत्पादन में गिरावट आ गई और धीरे-धीरे विलुप्त के कगार पर पहुंच गई थी।

मोटे अनाज की वर्तमान स्थिति

वर्तमान समय में भारत के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में काफी गिरावट देखी जा रहे है, इसका सबसे बड़ा कारण खान-पान में हो रही गड़बड़ी का है। मोटे अनाज में पोषक तत्व एवं विटामिन भरपूर मात्रा में उपस्थित है इसलिए वर्तमान सरकार ने मोटे अनाज को अत्यधिक उत्पादन करने के लिए अभियान चला रही है।
सन 2023 को खाद और कृषि संगठन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की गई है।

दोस्तों मुझे आशा है कि आपको हमारा लेख millet in hindi से संबंधित पूरी जानकारी प्राप्त हो गया होगा । आपको लगता है कि हमसे किसी प्रकार की जानकारी छूट गई है तो आप हमे टिप्पणी करके अवश्य बताएं।

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