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Weaver Bird Information In Hindi | बया पक्षी की पूरी जानकारी

Weaver Bird in Hindi – जय हिंद दोस्तों, बया एक नन्हीं एवं बेहद खूबसूरत पक्षी है जो दिखने में गौरैया के समान है। बया दुनियाभर में अपनी कला बुनकर के लिए काफी प्रसिद्ध है इसलिए इसको बुनकर पक्षी के नाम से संबोधित किया जाता है। बया को अंग्रेजी में Weaver Bird कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम फ्लोसीयस फिलीपिनस है। जो फ्लोसीयस वंश से अपना संबंध रखती है। बया पक्षी का निवास स्थान एशिया महाद्वीप है। पूरी दुनिया में बया पक्षी के लगभग 10 प्रजातियां पाई जाती है। बया पक्षी भोजन के रूप में बीज फसलें जैसे गेहूं, धान एवं किट पतंगों का सेवन करती हैं।
दोस्तों आज हम अपनी लेखन Weaver Bird in Hindi के बारे में संपूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करने वाले हैं तो हमारे साथ अंत तक बने रहे।

Information of Weaver Bird in Hindi | बया पक्षी की पूरी जानकारी

Information of Weaver Bird in Hindi

1. नर बया दिखने में हल्का काला एवं पीला रंग का होता है। वही मादा बया मेली भूरी रंग की होती है। बया पक्षी का आकार 8 से 12 इंच के बीच में होती है कुछ प्रजातियां 15 इंच के हो सकते हैं।

2. जुलाई माह के आरंभ में नर बया घोंसला बनाना शुरू कर देता है यह मुख्य रूप से नदी, तालाब, नहर नहर, पोखरा आदि के किनारे अपना घोंसला बनाना पसंद करता है क्योंकि इन जगहों पर भोजन आसानी से प्राप्त हो जाता है घोंसला बनाने में आवश्यक सामग्री ताड़ का पत्ता, घास आदि के प्रयोग से, लगभग 30 दिनों में अपना घोंसला बनाकर तैयार कर लेता है। घोसले में दो खांदे होते हैं एक खांदे में मादा बया अंडे सेती है वही दूसरे खांदे में नर एवं मादा दोनों साथ रहते हैं।

3. अगस्त माह में घोंसला बनकर तैयार हो जाता है इसके पश्चात नर बया, मादा बया को अपनी और आकर्षित करता है और मादा बया आकर्षित होने से पहले नर बया द्वारा बनाए गए घोंसले को देखती है। उसको घोंसला पसंद आती है तभी वह नर बया के साथ रहती है।

4. एक समय में मादा बया 4 से 5 अंडे देती है। चुजे का अंडे से बाहर आने में 15 से 20 दिनों का समय लग जाता है। तब तक मादा बया अंडे को सेती रहती है इतने समय तक नर बया इनके लिए भोजन की व्यवस्था कराता है।

5. बया पक्षी के चुजे अंडे से बाहर निकलने के 15वे दिन तक उड़ना सीख जाते हैं। बया पक्षी अपने समुदाय से बात करने के लिए चू – चू की आवाज निकालती है।

6. बया पक्षी (Weaver Bird) मनुष्य की तरह एक साथ रहना पसंद करती है। बया पक्षी अपना घोंसला एक साथ बनाती है मानो यह कॉलोनी हो अधिकांश कांटेदार पेड़ों में अपना घोंसला बनाती है जैसे ताड़ का पेड़

7. बया पक्षी भोजन के रूप में धान, गेहू, कीट पतंगे, फल आदि का सेवन करती है। यह सर्वाहारी पक्षी के श्रेणी में आती है।

8. पूरी संसार में बया पक्षी के घोसले की बनावट सबसे अच्छी होती है। नर बया को घोंसला बनाने में काफी मेहनत करना पड़ता है। घोंसला घास, पत्ता आदि के सहयोग से बनाता है। घोंसला बनाने के क्रम में नर बया को 400 से अधिक बार घास चुन के लाना पड़ता है। यह पक्षी की घोंसला अन्य पक्षियों की तुलना में काफी अलग होती है इनका घोंसला लालटेन आकार का होता है जो कांटेदार पेड़ की टहनी के आखिरी छोर पर बना होता है यही घोसले की खूबसूरती को बढ़ाता है एक सामूहिक पक्षी है जो कॉलोनी में रहना पसंद करती है।

9. बया पक्षी (Weaver Bird) का औसतन जीवनकाल 2 से 4 वर्ष के बीच होती है। फ्लोसीयस बरमनिकस नामक प्रजाति सबसे कम जी पाता है इसका जीवनकाल 1.5 से 2 वर्ष के बीच होता है। वही फ्लोसीयस ट्रवनकोरएनसीस नामक प्रजाति का पक्षी 5 वर्ष तक जीती है।

10. बया भोजन के रूप में बीज को बड़े चाव से खाती है कभी-कभी बया पक्षी झुंड में किसी किसान के खेत के लगभग सारी बीज को खा जाती है जिसके कारण से इसे किसानों का दुश्मन कहा जाता है।

11. वर्तमान समय में बया पक्षी विलुप्त के कगार पर आ गई है इसकी सबसे बड़ी वजह पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, इसके वजह से कई सारे पक्षियों के घोंसले एवं अंडे नष्ट हो जा रहे हैं इसके वजह से कई पक्षी अपना वंश आगे नहीं बढ़ा पा रही है उनमें से एक बया पक्षी भी शामिल है। इनका बचाओ भी हम मानव को करना होगा क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार अगर हम अभी से इस पक्षी का बचाओ ना करें तो आने वाले 10 सालों में यह पक्षी पुरी तरह से विलुप्त हो जाएगी।

12. बया पक्षी मुख्य रूप से एशिया महाद्वीप का मूल निवासी है लेकिन कुछ प्रजाति अफ्रीका महाद्वीप में भी पाई जाती है। ऑस्ट्रेलिया एवं अमेरिका महाद्वीप में इसकी अभाव देखने को मिलता है।

13. वर्तमान समय में हमारे केंद्र सरकार के द्वारा एक योजना शुरू किया गया है जिसका नाम मेरी माटी मेरा देश है। जो भारत के प्रत्येक व्यक्ति को एक-एक पौधे का रोपान करनी है यह एक अच्छी पहल है पर्यावरण को लेकर जिसमें सबसे ज्यादा फायदा हमारे पक्षियों को होगा।

14. बया पक्षी के घोसले इतने मजबूत रहते हैं कि तेज आंधी एवं पानी को भी सहन कर लेती है।

बया पक्षी की प्रजाति

पूरी दुनिया में बया पक्षी की लगभग 10 प्रजाति मौजूद है। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण प्रजाति जो भारत में पाए जाते हैं जो इस प्रकार है फ्लोसीयस ट्रवनकोरएनसीस, फ्लोसीयस बरमनिकस

1. फ्लोसीयस ट्रवनकोरएनसीस

बया पक्षी की प्रजाति जिसको दर्जिन के नाम से भी जानते हैं यह शुष्क वातावरण में रहना पसंद करती है इसलिए यह पक्षी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के नहरों के किनारे अपना घोंसला बनाती है।

2. फ्लोसीयस बरमनिकस

बया के इस प्रजाति का रंग पीला एवं भूरा होता है जिसके कारण दिखने में बेहद खूबसूरत होते हैं। यह प्रजाति अधिकांश कटीले जंगलों में अपना घोंसला बनाती है। बया पक्षी किया प्रजातियां झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार आदि जगह पर पाए जाते हैं।

बया पक्षी (Weaver Bird) की अनोखी जानकारी

नाम – हिंदी में बया, बुनकर
अंग्रेजी में – Weaver Bird
वैज्ञानिक नाम – फ्लोसीयस फिलीपिनस
भोजन – बीज, घास, किट पतंगे
अभाव – ऑस्ट्रेलिया एवं अमेरिका महाद्वीप
प्रजाति – 10 (लगभग)
वंश – फ्लोसीयस
जाति – फिलीपिनस
जगत – जंतु
जीवन काल – 2 से 4 वर्ष

बया पक्षी (Weaver Bird) के बारे में 10 लाइन

1. बया का वैज्ञानिक नाम फ्लोसीयस फिलीपिनस है।

2. बया पक्षी दिखने में बेहद खूबसूरत होती है।

3. नर बया, मादा बया को अपनी और आकर्षित करने के लिए घोंसले का निर्माण करता है।

4. दुनिया भर में बया की 10 प्रजातियां पाई जाती है।

5. मादा बया एक समय में 4 से 5 अंडे देती है।

6. बया पक्षी का प्रजनन मानसून के आगमन के समय होता है।

7. बया को चालाक पक्षी के श्रेणी में रखा गया है।

8. बया पक्षी की भारत में 2 प्रजातियां पाई जाती है। फ्लोसीयस ट्रवनकोरएनसीस, फ्लोसीयस बरमनिकस

9. बया पक्षी फ्लोसीयस वंश से संबंध रखती है।

10. बया पक्षी का अभाव ऑस्ट्रेलिया एवं अमेरिका महाद्वीप में देखने को मिलता है।

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दोस्तों मुझे बेहद आनंद है। कि हमारा लेखन Weaver Bird in Hindi सबसे अच्छी लगी हो।
अगर हमसे किसी प्रकार की जानकारी छूट गई है तो हमे कमेंट के माध्यम से बता सकते हैं।

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